शिवा-बावनी – ४ / Shiva Baavni – 4

The fourth of the 52; (बावनी)। We have an English and a हिन्दी translation. Scroll to the language of your choice.

We are very grateful to Shree Rajendra Chandrakant Rai, our Mentor & Advisor for teaching us the wonderful nuances, and helping us discover the beauty of Mahakavi Bhushan’s poetry.


बद्दल न होंहिं दल दच्छिन घमंड माँहिं,
घटा हू न होहि दल सिवाजी हँकारी के ।
दामिनी दमंक नाहि खुले खग्ग विरन के,
वीर सिर छाप लखु तीजा असवारी के ।।
देखि देखि मुगलों की हरमैं भवन त्यागैं,
उझकि उझकि उठैं बहत बयारी के ।
दिल्ली मति भूली कहैं बात घन घोर घोर,
बाजत नगारे जे सितारे गढ़ धारी के ।।


शब्दार्थ

बद्दल = बादल। हँकारी = घमण्डी, अहंकारी। दामिनी = बिजली। दमंक = दमाक, चमक। खग्ग = खङ्ग, खांड़ा (तलवार)। सिर छाप = साफ़े के ऊपर, सामने की ओर वीर सिपाही भाँति-भाँति के सुन्दर चमकदार चिन्ह (छाप) लगा लेते थे। तीजा असवारी = हरितालिका तीज। हरमैं = परदे में रहनेवाली स्त्रियाँ, बेगमें। उझकि उठना = चौंक जाना। बयारी = वायु। मति भूली = भ्रम में पड़ी। सितारे गढ़ धारी = सितारे के किले का स्वामी, शिवाजी।

भावार्थ

कवि भूषण कहते हैं कि शिवाजी के पराक्रम का ऐसा प्रभाव है कि उनके शत्रुओं में आशंकाओं के कारण सदैव ही, संदेह और भ्रम का वातावरण बना रहता है। आकाश में जब बादल गर्जना करते हैं तो उन्हें लगता है कि शिवाजी की सेना अपनी वीरता के अभिमान में गर्जना कर रही है। काले-काले बादलों से युक्त घटाएं जब उमड़ती हैं तो, उन्हें ऐसा प्रतीत होता है कि शिवाजी की सेना के चलने के कारण आकाष में धूल के बादल उमड़ पड़े हैं। आकाष में बिजली की चमक को शत्रुदल, शिवाजी के सैनिकों की खुली हुई तलवारें ही समझ लेते हैं और उन्हें ऐसा प्रतीत होता है कि वीर सैनिक अपने सिरों पर बंधे हुए भांति-भांति के सुंदर और चमकदार चिन्हों को धारण किये हुए हैं। राजपूताने में हरितालिका के दिन राजाओं और सैनिकों की सवारियां इसी तरह से सज-धजकर निकला करती हैं।

इन सब दृश्यों को देखकर मुगलों की स्त्रियां भी भयभीत हो गयी हैं, और अपने-अपने महलों से इधर-उधर भाग रहीं हैं। हवा के तेज झोंको के चलने पर वे चौंक पडती हैं। कवि कगते हैं कि दिल्ली के बादशाह की तो अक्ल ही मारी गयी है। वह महाराज शिवाजी की सेनाओं के नगाड़ों की आवाज़ सुनकर अकर्मण्य ही हो जाता है।

काव्य सुषमा

  1. शुद्ध अपन्हुति अलंकार
  2. संदेह अलंकार
  3. अनुप्रास अलंकार
  4. अतिशयोक्ति अलंकार
  5. ‘अक्ल मारी जाना’ मुहावरे का प्रयोग हुआ है।

English Translation


Baddala na hōnhiṁ dala dacchina ghamaṇḍa māhiṁ,
ghaṭā hū na hōhi dala sivājī hankārī kē.
Dāminī damaṅka nāhi khulē khagga virana kē,
vīra sira chāpa lakhu tījā asavārī kē.
Dēkhi dēkhi mugalōṁ kī haramaiṁ bhavana tyāgaiṁ,
ujhaki ujhaki uṭhaiṁ bahata bayārī kē.
Dillī mati bhūlī kahaiṁ bāta ghana ghōra ghōra,
bājata nagārē jē sitārē gaṛha dhārī kē.


Word Meanings

बद्दल = cloud. हँकारी = proud, egoistic. दामिनी = lightening. दमंक = shine। खग्ग = khanda is a double-edge straight sword. सिर छाप = emblem, crest, decoration on the turban/head-dress. तीजा असवारी = Teej, a generic festival name. हरमैं = harems; members of a harem. उझकि उठना = bewildered; confounded. बयारी = wind. मति भूली = to lose one’s senses सितारे गढ़ धारी = lord of the fort, i.e. Shivaji

Essence

Kavi Bhushan describes, that the effect of Shivaji’s valour is such that his enemies are in a constant state of doubt and fear. When there’s thunder, they sense that it is Shivaji’s brave army that is approaching them. When the sky darkens with rain clouds, they assume it to the dust raised into sky, by the march of Shivaji’s armies, that blankets the sun. When lightning strikes they assume it to be the reflection of the swords brandished by the soldiers and the emblems on their head-dress.

Seeing these sights, the women in the harems run helter-skelter from palace to palace. Even the gusts of wind confound them. The regent of Delhi loses his senses when hears the sounds of Shivaji’s kettle-drums.

संदर्भ / References

  1. पं॰ हरिशंकर शर्मा कविरत्न। शिवा-बावनी, टीका-टिप्पनी, अलंकार तथा प्रस्तावना सहित। आगरा: रामप्रसाद एण्ड ब्रदर्स
  2. आनन्द मिश्र ‘अभय’।। शिवा-बावनी, छत्रसाल दशक सहित। लकनऊ: लोकहित प्रकाशन। २०१२
  3. आचार्य विश्वनाथप्रसाद मिश्र। भूषण ग्रंथावली। नयी दिल्ली: वाणी प्रकाशन। २०१२।

Nagada / Kettle-drums. Image Courtesy Samir Pathak. Taken at Saswad, MH, India
Nagada / Kettle-drums. Image Courtesy Samir Pathak. Taken at Saswad, MH, India
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